📖 संक्षिप्त परिचय: ग्राम पंचायत भारत की ग्रामीण लोकतंत्र की मूल इकाई है। यह गाँव के स्तर पर स्व-शासन (Self-Government) का माध्यम है, जो 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। ग्राम सभा इसकी "आम सभा" (General Assembly) है जिसमें गांव के सभी पंजीकृत मतदाता सदस्य होते हैं। उत्तर प्रदेश में यह व्यवस्था UP पंचायत राज अधिनियम, 1947 और UP क्षेत्र पंचायत तथा ज़िला पंचायत अधिनियम, 1961 से संचालित है।
- 1. ग्राम सभा — क्या है?
- 2. ग्राम पंचायत — क्या है?
- 3. त्रि-स्तरीय पंचायती राज संरचना
- 4. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- 5. 73वाँ संविधान संशोधन, 1992
- 6. 11वीं अनुसूची — 29 विषय
- 7. ग्राम पंचायत के प्रमुख कार्य
- 8. आरक्षण की व्यवस्था
- 9. वित्तीय स्रोत (Finances)
- 10. चुनाव व्यवस्था
- 11. GPDP — सबकी योजना सबका विकास
- 12. ग्राम सभा बनाम ग्राम पंचायत
- 13. PESA अधिनियम, 1996
- 14. चुनौतियाँ
- 15. सुधार और नवाचार
- 16. UP पंचायत राज अधिनियम 1947
- 17. UP में ग्राम सभा
- 18. UP में ग्राम पंचायत का गठन
- 19. UP की 6 समितियाँ
- 20. UP कार्य (धारा 15)
- 21. भूमि प्रबंधक समिति
- 22. न्याय पंचायत (UP)
- 23. UP में मानदेय (2025-26)
- 24. UP पंचायत चुनाव 2026
- 25. UP में क्षेत्र व ज़िला पंचायत
- 26. UP में प्रमुख कार्यक्रम
- 27. UP की चुनौतियाँ
- 28. नागरिक अधिकार (RTI)
- 29. आधिकारिक लिंक्स
- 30. FAQ — सामान्य प्रश्न
परिभाषा
अनुच्छेद 243(ख) के अनुसार, ग्राम सभा एक ऐसी संस्था है जिसमें "ग्राम पंचायत क्षेत्र के भीतर आने वाले गांव से संबंधित मतदाता सूची में पंजीकृत सभी व्यक्ति" शामिल होते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
- सार्वभौमिक सदस्यता: 18+ वर्ष के सभी पंजीकृत मतदाता स्वतः सदस्य
- चुनाव नहीं होता — यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र का रूप है
- स्थायी संस्था — कोई निश्चित कार्यकाल नहीं
- पंचायती राज की नींव — लेकिन 3-स्तरीय प्रणाली का हिस्सा नहीं
- 73वें संशोधन का सार: "प्रत्येक गांव में ग्राम सभा होगी जिसके प्रति पंचायत उत्तरदायी होगी"
बैठकें (Meetings)
- वर्ष में कम से कम 2–4 बार (राज्य के अनुसार)
- आमतौर पर चार राष्ट्रीय/सांस्कृतिक तिथियों पर:
- गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) — खरीफ बैठक
- मज़दूर दिवस (1 मई)
- स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त)
- गांधी जयंती (2 अक्टूबर) — रबी बैठक
- विशेष बैठक: 10% सदस्यों या 50 सदस्यों (जो अधिक हो) की लिखित मांग पर
- अध्यक्षता: सरपंच/प्रधान (अनुपस्थिति में उप-प्रधान या चुना गया सदस्य)
- कोरम: कुल सदस्यों का न्यूनतम 10%
ग्राम सभा के प्रमुख कार्य
- ग्राम पंचायत के बजट व विकास योजनाओं की स्वीकृति
- लाभार्थियों की पहचान (पेंशन, आवास, मनरेगा आदि)
- सोशल ऑडिट (विशेषकर मनरेगा कार्यों का)
- ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तैयार करना
- ऑडिट रिपोर्ट की समीक्षा
- पंचायत के प्रदर्शन का मूल्यांकन
- PESA क्षेत्रों में: आदिवासी परंपराओं, रीति-रिवाजों की रक्षा
परिभाषा
ग्राम पंचायत गांव का निर्वाचित शासी निकाय है। यह ग्राम सभा की "कैबिनेट" की तरह काम करती है और गांव की कार्यकारी निर्णय लेने वाली संस्था है।
संरचना
- अध्यक्ष (Chairperson): सरपंच / प्रधान / मुखिया (राज्य के अनुसार नाम बदलता है)
- उपाध्यक्ष: उप-सरपंच / उप-प्रधान (UP में 2007 से समाप्त)
- पंच (Panches): वार्ड सदस्य, सीधे मतदाताओं द्वारा चुने जाते हैं
- सचिव (Secretary): ग्राम सेवक / पंचायत सचिव — प्रशासनिक प्रमुख (सरकारी कर्मचारी)
भारत में संख्या (2025)
- लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतें
- 6,000 से अधिक मध्यवर्ती पंचायतें (ब्लॉक स्तर)
- 600+ जिला पंचायतें
- 28 लाख+ निर्वाचित प्रतिनिधि (पंच/सरपंच/सदस्य)
कार्यकाल
5 वर्ष (न्यूनतम आयु 21 वर्ष चुनाव लड़ने के लिए)
| स्तर | निकाय | क्षेत्र | मुखिया |
|---|---|---|---|
| 1 (गांव) | ग्राम पंचायत | एक गांव या गांवों का समूह | सरपंच/प्रधान |
| 2 (ब्लॉक) | पंचायत समिति / क्षेत्र पंचायत | ब्लॉक/तहसील | प्रमुख/अध्यक्ष |
| 3 (जिला) | ज़िला परिषद / ज़िला पंचायत | जिला | अध्यक्ष |
ℹ️ नोट: 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों को मध्यवर्ती (ब्लॉक) स्तर छोड़ने का विकल्प है।
राज्यवार नामकरण में अंतर
- ग्राम पंचायत: सभी राज्यों में लगभग समान
- पंचायत समिति: महाराष्ट्र में "Panchayat Samiti"; UP में "क्षेत्र पंचायत"; आंध्र में "Mandal Praja Parishad"; गुजरात में "Taluka Panchayat"; कर्नाटक/तमिलनाडु में "Uratchi Onriyam"
- ज़िला परिषद: UP में "ज़िला पंचायत"; आंध्र में "Zila Praja Parishad"
प्रमुख मील के पत्थर
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| प्राचीन वैदिक काल | सभा, समिति, ग्रामीणी के रूप में ग्राम परिषदें |
| 1907 | Royal Commission on Decentralization |
| 1957 | बलवंत राय मेहता समिति ने त्रि-स्तरीय पंचायती राज की सिफ़ारिश की |
| 2 अक्टूबर 1959 | राजस्थान पहला राज्य — नागौर जिले के बगदरी गांव में पंचायती राज शुरू (नेहरू ने उद्घाटन किया) |
| 1977 | अशोक मेहता समिति |
| 1986 | L.M. सिंघवी समिति |
| 24 अप्रैल 1993 | 73वाँ संविधान संशोधन लागू — संवैधानिक दर्जा प्राप्त |
| 1996 | PESA अधिनियम — अनुसूचित क्षेत्रों के लिए |
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस
24 अप्रैल — 1993 में 73वें संशोधन के लागू होने की याद में।
प्रमुख प्रावधान
- भाग IX जोड़ा गया — "पंचायतें"
- अनुच्छेद 243 से 243-O (कुल 16 अनुच्छेद)
- 11वीं अनुसूची जोड़ी गई — 29 विषय पंचायतों को हस्तांतरित
- अनुच्छेद 40 (DPSP) को न्यायसंगत (justiciable) बनाया
प्रमुख अनुच्छेद (सभी 16)
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 243(ख) | ग्राम सभा की परिभाषा |
| 243-A | ग्राम सभा की शक्तियाँ |
| 243-B | पंचायतों का गठन |
| 243-C | संरचना |
| 243-D | सीटों का आरक्षण (SC/ST/महिलाएँ) |
| 243-E | कार्यकाल (5 वर्ष) |
| 243-F | सदस्यता के लिए अयोग्यता |
| 243-G | पंचायतों की शक्तियाँ, अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ |
| 243-H | वित्तीय शक्तियाँ (कर लगाना) |
| 243-I | राज्य वित्त आयोग |
| 243-J | खातों का ऑडिट |
| 243-K | राज्य निर्वाचन आयोग |
| 243-L | केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू |
| 243-M | अपवाद (नगालैंड, मेघालय, मिज़ोरम) |
| 243-N | मौजूदा क़ानूनों की निरंतरता |
| 243-O | न्यायिक हस्तक्षेप पर रोक |
जहाँ पंचायती राज लागू नहीं है
- राज्य: नगालैंड, मेघालय, मिज़ोरम (पारंपरिक जनजातीय शासन)
- केंद्र शासित: दिल्ली
- अनुसूची 6 के क्षेत्र: असम, त्रिपुरा के कुछ हिस्से (अलग स्वायत्त परिषदें)
ग्राम पंचायतों को ये 29 विषय सौंपे गए हैं:
कृषि व पशुपालन (1–4)
- कृषि, कृषि विस्तार
- भूमि सुधार, भूमि समेकन, मृदा संरक्षण
- लघु सिंचाई, जल प्रबंधन
- पशुपालन, डेयरी, मुर्गीपालन
मत्स्य-वानिकी (5–7)
- मत्स्य पालन
- सामाजिक वानिकी, कृषि-वानिकी
- लघु वन उत्पाद
उद्योग व आधारभूत ढाँचा (8–13)
- लघु उद्योग (खाद्य प्रसंस्करण सहित)
- खादी, ग्राम व कुटीर उद्योग
- ग्रामीण आवास
- पेयजल
- ईंधन और चारा
- सड़कें, पुल, पुलिया, घाट, जलमार्ग
ऊर्जा व शिक्षा (14–17)
- ग्रामीण विद्युतीकरण
- ग़ैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत
- गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम
- शिक्षा (प्राथमिक व माध्यमिक)
तकनीकी व व्यावसायिक (18–21)
- तकनीकी प्रशिक्षण, व्यावसायिक शिक्षा
- प्रौढ़ शिक्षा
- पुस्तकालय
- सांस्कृतिक गतिविधियाँ
सामाजिक क्षेत्र (22–29)
- बाज़ार व मेले
- स्वास्थ्य, अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
- परिवार कल्याण
- महिला व बाल विकास
- समाज कल्याण (दिव्यांग व मानसिक रूप से बीमार)
- कमज़ोर वर्गों का कल्याण (SC/ST)
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)
- सामुदायिक सम्पत्ति का रखरखाव
अनिवार्य कार्य
- पेयजल की व्यवस्था
- गांव की सड़कों, नालियों, पुलों का निर्माण व रखरखाव
- स्ट्रीट लाइट लगाना व चालू रखना
- स्वच्छता व कचरा प्रबंधन
- सार्वजनिक शौचालय
- जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन
- प्राथमिक शिक्षा
- टीकाकरण अभियान
विकासात्मक कार्य
- मनरेगा (VB–G RAM G) का कार्यान्वयन
- PMAY-G आवास योजना
- स्वच्छ भारत मिशन (SBM)
- मध्याह्न भोजन योजना
- पुस्तकालय, विवाह हॉल, सामुदायिक भवन बनाना
- तालाब, बाग़ान, उद्यान विकसित करना
- उचित दर की दुकानें (राशन) चलाना
- सहकारी समितियाँ
न्यायिक कार्य
- न्याय पंचायत के ज़रिए
- छोटे विवाद निपटाना
- ₹100 तक जुर्माना लगाने का अधिकार
73वें संशोधन के तहत अनिवार्य
- SC/ST: जनसंख्या अनुपात के आधार पर
- महिलाएँ: कम से कम 1/3 सीटें (कई राज्यों में 50% तक बढ़ाया गया)
- OBC: राज्य विधानमंडल के विवेकाधीन
- अध्यक्ष पद: तीनों स्तरों पर आरक्षण रोटेशन में
महिला सशक्तिकरण
- बिहार (2006) — 50% आरक्षण देने वाला पहला राज्य
- अब 20+ राज्यों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण
- भारत में 14 लाख+ महिला प्रतिनिधि पंचायती राज में
आय के मुख्य स्रोत
- राज्य वित्त आयोग द्वारा सिफारिश किए गए हस्तांतरण
- केंद्रीय वित्त आयोग अनुदान (15वें FC में ~₹2.36 लाख करोड़)
- स्थानीय कर:
- संपत्ति कर
- व्यवसाय कर
- मनोरंजन कर
- उपयोगकर्ता शुल्क (पानी, स्वच्छता)
- केंद्र प्रायोजित योजनाएँ (मनरेगा, PMAY, आदि)
- राज्य साझा कर
- CSR व दान
राज्य वित्त आयोग (SFC)
- अनुच्छेद 243-I के तहत
- हर 5 वर्ष में राज्यपाल द्वारा गठित
- पंचायतों को कर-हिस्सा व अनुदान की सिफ़ारिश करता है
राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission)
- अनुच्छेद 243-K के तहत स्वतंत्र संस्था
- मतदाता सूची तैयार करना
- निष्पक्ष चुनाव कराना
- राज्यपाल द्वारा नियुक्त
चुनाव की मुख्य शर्तें
- आयु: 21+ वर्ष (उम्मीदवार)
- निवास: संबंधित पंचायत क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम
- कार्यकाल: 5 वर्ष
- पंचायत विघटन पर: 6 महीने में पुनर्चुनाव अनिवार्य
अयोग्यताएँ (अनुच्छेद 243-F)
- विधायिका चुनाव के लिए अयोग्य व्यक्ति
- राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित अन्य आधार
- 2 से अधिक बच्चे (कुछ राज्यों में)
- शौचालय न होना (हरियाणा, राजस्थान)
- बिजली/पानी बिल बक़ाया (कुछ राज्यों में)
"सबकी योजना सबका विकास"
- सालाना अभियान (2 अक्टूबर – 31 जनवरी)
- हर ग्राम पंचायत अपनी 5-वर्षीय विज़न + वार्षिक योजना बनाती है
- पोर्टल: gpdp.nic.in
- ग्राम सभा की स्वीकृति अनिवार्य
- 11वीं अनुसूची के 29 विषयों पर आधारित
सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit)
- मनरेगा कार्यों का अनिवार्य ऑडिट
- SAU (Social Audit Unit) द्वारा
- विशेष ग्राम सभा बैठक में रिपोर्ट
| आधार | ग्राम सभा | ग्राम पंचायत |
|---|---|---|
| सदस्य | सभी पंजीकृत मतदाता | निर्वाचित पंच/सरपंच |
| चुनाव | नहीं होता | 5 वर्ष में |
| कार्यकाल | स्थायी | 5 वर्ष |
| प्रकार | विचार-विमर्श निकाय | कार्यकारी निकाय |
| भूमिका | नीति अनुमोदक | नीति क्रियान्वयन |
| बैठकें | वर्ष में 2–4 बार | महीने में 1–2 बार |
| उत्तरदायित्व | — | ग्राम सभा के प्रति |
विशेष प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों के लिए)
पूर्ण नाम: Provisions of the Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act
लागू राज्य
आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना
ग्राम सभा की विशेष शक्तियाँ
- आदिवासी परंपराओं, रीति-रिवाजों की रक्षा
- भूमि अधिग्रहण से पहले सहमति ज़रूरी
- लघु वन उत्पादों का स्वामित्व
- लघु जल निकायों का प्रबंधन
- लघु खनिजों पर नियंत्रण
- मद्यनिषेध, साहूकारी नियंत्रण
- सामाजिक योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान
- अपर्याप्त वित्तीय संसाधन — ज़्यादातर पंचायतें अनुदान पर निर्भर
- 3Fs की समस्या — Funds, Functions, Functionaries का अधूरा हस्तांतरण
- नौकरशाही नियंत्रण — BDO/DM की अत्यधिक भूमिका
- क्षमता की कमी — प्रशिक्षित कर्मचारियों का अभाव
- पुरुष प्रभुत्व — महिला प्रधानों के पतियों द्वारा "सरपंच पति" प्रथा
- साक्षरता में कमी — ग्राम सभा की जागरूकता सीमित
- जाति आधारित राजनीति — सत्ताधारी जातियों का वर्चस्व
- वित्त आयोग सिफ़ारिशों में देरी
- MLA/MP का हस्तक्षेप — लाभार्थी चयन में
डिजिटल पहल
- e-Panchayat मिशन मोड परियोजना
- PlanPlus — ऑनलाइन योजना सॉफ्टवेयर
- ActionSoft — भौतिक-वित्तीय प्रगति निगरानी
- PRIA Soft — लेखांकन
- AuditOnline — सोशल ऑडिट
सरकारी कार्यक्रम
- RGPSA (राजीव गांधी पंचायत सशक्तीकरण अभियान) — 75% केंद्र, 25% राज्य
- Amrit Sarovar — जल संरक्षण
- SVAMITVA योजना — ड्रोन से संपत्ति सर्वेक्षण
- पंचायत भवन निर्माण
पंचायत पुरस्कार
- दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तीकरण पुरस्कार
- नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार
- ग्राम पंचायत विकास योजना पुरस्कार
- ई-पंचायत पुरस्कार
पृष्ठभूमि
- 7 दिसंबर 1947 को भारत के गवर्नर-जनरल की सहमति से पारित
- 27 दिसंबर 1947 को राजपत्र में प्रकाशित
- 1994 में 73वें संशोधन के अनुरूप बड़े संशोधन किए गए
UP के प्रमुख आँकड़े (2026)
- ग्राम पंचायतें: ~58,000
- क्षेत्र पंचायतें: ~826
- ज़िला पंचायतें: 75
- न्याय पंचायतें: ~8,135
- कुल निर्वाचित प्रतिनिधि: लगभग 8 लाख
प्रमुख धाराएँ
| धारा | विषय |
|---|---|
| धारा 2(g) | ग्राम सभा की परिभाषा |
| धारा 2(h) | ग्राम पंचायत की परिभाषा |
| धारा 3 | ग्राम सभा की स्थापना |
| धारा 5 | ग्राम सभा के सदस्य |
| धारा 11-A | प्रधान का पद (2007 संशोधन के बाद केवल प्रधान) |
| धारा 11-B | प्रधान का चुनाव |
| धारा 12 | ग्राम पंचायत का गठन |
| धारा 12-J | रिक्ति की स्थिति में अस्थायी व्यवस्था |
| धारा 15 | ग्राम पंचायत के कार्य |
| धारा 28-A | भूमि प्रबंधक समिति |
| धारा 42 | न्याय पंचायत |
⚠️ नोट (2007 संशोधन): धारा 11-C (उप-प्रधान का चुनाव) को U.P. Act No. 44 of 2007 के द्वारा पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है। अब UP में ग्राम पंचायत में उप-प्रधान का पद अस्तित्व में नहीं है। 20 अगस्त 2007 से प्रभावी इस अधिनियम ने तीनों स्तरों पर "उप" पद — उप-प्रधान (ग्राम), उप-प्रमुख (ब्लॉक — Senior/Junior दोनों), और उपाध्यक्ष (जिला) — एक साथ समाप्त किए।
गठन
- राज्य सरकार की अधिसूचना से एक गांव या गांवों के समूह के लिए गठित
- सर्वाधिक जनसंख्या वाले गांव के नाम से पहचानी जाती है
- प्रत्येक तहसील में गठित ग्राम सभाओं की सूची तहसील मुख्यालय और ज़िला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय पर सार्वजनिक
सदस्यता
- मतदाता सूची में दर्ज सभी 18+ वर्ष के व्यक्ति स्वतः सदस्य
- कोई चुनाव नहीं, कोई अलग पंजीकरण नहीं
बैठकें (UP Panchayat Raj Rules, 1947)
वर्ष में दो अनिवार्य आम बैठकें:
- खरीफ बैठक — खरीफ फसल कटाई के बाद (सामान्यतः 26 जनवरी)
- रबी बैठक — रबी फसल कटाई के बाद (सामान्यतः 15 अगस्त के आसपास)
विशेष बैठकें
- प्रधान कभी भी बुला सकते हैं
- 1/5 (20%) सदस्यों की लिखित मांग पर प्रधान को 30 दिन में बुलानी अनिवार्य
- निर्धारित प्राधिकारी के अनुरोध पर
- सूचना प्रकाशन: ग्राम सभा कार्यालय/सार्वजनिक स्थानों पर; ढोल-नगाड़े बजाकर भी घोषणा की जा सकती है
कोरम व रिकॉर्ड
- कोरम: कुल सदस्यों का न्यूनतम 1/5 (20%)
- अध्यक्षता: प्रधान; अनुपस्थिति में ग्राम सभा द्वारा बहुमत से चुना गया सदस्य
- कार्यवाही हिंदी में Form में दर्ज अनिवार्य
UP में ग्राम सभा के कार्य
- ग्राम पंचायत के बजट की स्वीकृति
- पिछले वर्ष के कार्यों की समीक्षा
- लाभार्थियों की पहचान (PMAY, पेंशन, छात्रवृत्ति)
- विकास योजनाओं का अनुमोदन
- प्रधान को 2/3 बहुमत से हटाने का प्रस्ताव (धारा 14)
- सोशल ऑडिट में भाग
आवश्यक शर्त
- प्रधान और ग्राम पंचायत के कम से कम 2/3 सदस्यों का चुनाव अनिवार्य
- तभी ग्राम पंचायत का गठन घोषित किया जाएगा
संरचना (2007 संशोधन के बाद)
- प्रधान (धारा 11-A) — अध्यक्ष
- ग्राम पंचायत सदस्य (Panches) — वार्ड सदस्य, सीधे मतदाताओं द्वारा चुने जाते हैं
- ग्राम पंचायत सचिव / पंचायत सहायक (प्रशासनिक)
- लेखपाल — भूमि प्रबंधक समिति का सचिव
प्रधान का चुनाव (धारा 11-B)
- पंचायत क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज लोग अपने में से प्रधान चुनते हैं (प्रत्यक्ष चुनाव)
- कार्यकाल: ग्राम पंचायत के कार्यकाल के समान (5 वर्ष)
प्रधान की रिक्ति की स्थिति में (धारा 12-J)
- मृत्यु, त्यागपत्र, अनुपस्थिति, बीमारी या किसी अन्य कारण से प्रधान का पद रिक्त होने पर
- निर्धारित प्राधिकारी (District Magistrate/SDM) द्वारा ग्राम पंचायत के किसी सदस्य को अस्थायी रूप से प्रधान के दायित्व व शक्तियाँ सौंपी जाती हैं
- यह व्यवस्था तब तक चलती है जब तक नियमित प्रधान न आए या अयोग्यता समाप्त न हो जाए
आरक्षण (धारा 11-A)
- SC/ST: जनसंख्या अनुपात से
- OBC/महिला: रोटेशन में (कम से कम 1/3 महिलाओं के लिए)
- आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 334 की अवधि तक लागू
📌 महत्वपूर्ण: UP में ग्राम पंचायत/ज़िला पंचायत के कार्यों को 6 विशेष समितियों के माध्यम से निष्पादित किया जाता है।
| क्रम | समिति का नाम | कार्य क्षेत्र |
|---|---|---|
| 1 | निर्माण कार्य समिति (Nirman Karya Samiti) | निर्माण कार्य, गुणवत्ता नियंत्रण |
| 2 | जल प्रबंधन समिति (Jal Prabandhan Samiti) | पेयजल, जल स्रोत प्रबंधन |
| 3 | नियोजन एवं विकास समिति (Niyojan Evam Vikas Samiti) | कृषि, पशुपालन, विकास योजना |
| 4 | स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति (Swasthya Evam Kalyan Samiti) | चिकित्सा, सामाजिक व परिवार कल्याण, महिला-बाल कल्याण |
| 5 | प्रशासनिक समिति (Prasashanik Samiti) | कर्मचारी प्रबंधन, राशन दुकानें |
| 6 | शिक्षा समिति | प्राथमिक शिक्षा |
प्रत्येक समिति की संरचना
- अध्यक्ष: प्रधान / कोई सदस्य (समिति द्वारा चुना गया)
- आवश्यक प्रतिनिधित्व — प्रत्येक समिति में कम से कम:
- एक महिला सदस्य
- एक SC/ST सदस्य
- एक OBC सदस्य
कृषि व पशुपालन
- कृषि विकास को बढ़ावा
- बंजर भूमि व चरागाह का विकास
- भूमि विकास में सरकार की सहायता
- लघु सिंचाई परियोजनाओं में जल वितरण में सहायता
- डेयरी, मुर्गीपालन, सूअर पालन को बढ़ावा
आधारभूत ढाँचा
- गांव की सड़कों, नालियों, पुलों का निर्माण/मरम्मत
- पेयजल (हैंडपंप, कुएँ, नल)
- स्ट्रीट लाइट
- पंचायत भवन का रखरखाव
- स्कूल भवन, सामुदायिक भवन, लैंप-पोस्ट
सामाजिक सेवाएँ
- प्राथमिक शिक्षा
- स्वच्छता और कचरा प्रबंधन
- सार्वजनिक शौचालय
- आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन
- जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन
- टीकाकरण सहायता
योजनाओं का कार्यान्वयन
- मनरेगा (VB–G RAM G)
- PMAY-G — ग्रामीण आवास
- स्वच्छ भारत मिशन
- अमृत सरोवर
- Total Sanitation Campaign (1999 से)
- जल जीवन मिशन
वित्तीय व विनियामक
- स्थानीय कर संग्रह
- उचित दर की दुकानें (PDS)
- गांव के मेलों/हाटों का संचालन
पृष्ठभूमि (धारा 28-A)
UP Zamindari Abolition and Land Reforms Act, 1950 के तहत बनाई गई विशेष समिति।
संरचना (2007 संशोधन के बाद — धारा 28-A(2))
- अध्यक्ष: ग्राम पंचायत का प्रधान
- सचिव: क्षेत्र का लेखपाल (Lekhpal सदस्य नहीं होता)
- अन्य सदस्य: ग्राम पंचायत के निर्वाचित सदस्यों में से
कार्य
- ग्राम सभा की भूमि का प्रबंधन
- भूमिहीन कृषि मज़दूरों (SC/ST/OBC/BPL) को पट्टा देना
- सिलिंग सरप्लस भूमि का वितरण
- सार्वजनिक ज़मीन पर अतिक्रमण रोकना
- स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को भूमि
गठन (धारा 42)
- प्रत्येक जिले को सर्कल में बाँटा जाता है
- एक सर्कल में कई ग्राम पंचायतों का समूह
- हर सर्कल के लिए एक न्याय पंचायत
- UP में लगभग 8,135 न्याय पंचायतें
संरचना
- पंच (Panches): 10–25 (संबंधित ग्राम पंचायतों से चुने गए)
- दो ग्राम सभाओं की न्याय पंचायत: 5 पंच प्रत्येक से
कार्य
- छोटे सिविल व आपराधिक मामले
- तेज़ और सस्ता न्याय
- ₹100 तक जुर्माना लगाने का अधिकार
निर्वाचित प्रतिनिधियों का मानदेय
| पद | मासिक मानदेय / बैठक भत्ता |
|---|---|
| ग्राम प्रधान | ₹5,000/माह (2021 में ₹3,500 से बढ़ाकर) |
| ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड) | कोई मासिक मानदेय नहीं, केवल बैठक भत्ता |
| BDC / क्षेत्र पंचायत सदस्य | ₹1,000/बैठक |
| ब्लॉक प्रमुख (क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष) | ₹11,300/माह |
| ज़िला पंचायत सदस्य | ₹1,500/बैठक |
| ज़िला पंचायत अध्यक्ष | ₹15,500/माह + सरकारी वाहन + स्टाफ़ (राज्य मंत्री का दर्जा) |
⚠️ नोट: 2007 संशोधन के बाद UP में उप-प्रधान, उप-प्रमुख और उपाध्यक्ष पद अस्तित्व में नहीं हैं, इसलिए इन पदों के लिए कोई मानदेय नहीं।
प्रशासनिक कर्मचारी
| पद | मानदेय/वेतन |
|---|---|
| पंचायत सहायक / DEO | ₹6,000/माह (मानदेय) |
| ग्राम पंचायत अधिकारी (VPO) | 7वें वेतन आयोग के अनुसार (Level 6) |
| लेखपाल | UP राजस्व विभाग के नियमों से |
ℹ️ नोट: दिसंबर 2021 में योगी सरकार ने प्रधानों का मानदेय ₹3,500 से ₹5,000 किया।
चुनाव का समय
- अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच प्रस्तावित
- पिछला चुनाव: अप्रैल 2021
- राज्य निर्वाचन आयोग (SEC UP) द्वारा कराए जाएँगे
पदों के लिए चुनाव
- ग्राम प्रधान (सीधा चुनाव)
- ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड)
- क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC)
- ज़िला पंचायत सदस्य
- ब्लॉक प्रमुख, ज़िला पंचायत अध्यक्ष — अप्रत्यक्ष चुनाव
नामांकन शुल्क और जमानत राशि (2026 SEC अधिसूचना)
ग्राम प्रधान
| श्रेणी | नामांकन शुल्क | जमानत राशि | अधिकतम व्यय सीमा |
|---|---|---|---|
| सामान्य | ₹600 | ₹3,000 | ₹1,25,000 |
| SC/ST/OBC/महिला | ₹300 | ₹1,500 | ₹1,25,000 |
BDC (क्षेत्र पंचायत सदस्य)
| श्रेणी | नामांकन | जमानत | व्यय सीमा |
|---|---|---|---|
| सामान्य | ₹600 | ₹3,000 | ₹1,00,000 |
| SC/ST/OBC/महिला | ₹300 | ₹1,500 | ₹1,00,000 |
अन्य पद
- ज़िला पंचायत सदस्य: व्यय सीमा बढ़ाकर ₹2 लाख
- ज़िला पंचायत अध्यक्ष: व्यय सीमा बढ़ाकर ₹7 लाख
चुनाव लड़ने की पात्रता
- आयु: 21+ वर्ष
- निवास: संबंधित क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम
- शौचालय घर में होना ज़रूरी
- बिजली/पानी/हाउस टैक्स बकाया न हो
- 2 से अधिक बच्चे वालों पर कुछ प्रतिबंध
- दिवालिया घोषित न हो
- नैतिक अधमता के अपराध में दोषसिद्ध न हो
चुनाव की महत्वपूर्ण प्रक्रिया
आरक्षण रोटेशन
- हर चुनाव में सीटें रोटेशन में आरक्षित
- जो सीट 2021 में SC आरक्षित थी, वह 2026 में सामान्य हो सकती है
- SC/ST/OBC/महिला आरक्षण जनसंख्या अनुपात के आधार पर
मतदाता सूची
- e-BLO मोबाइल ऐप के ज़रिए सूची तैयार
- डुप्लिकेट नाम हटाने के लिए विशेष अभियान (2025–26)
चुनाव प्रचार
- पोस्टर, पम्पलेट, जनसभा
- सोशल मीडिया प्रचार भी प्रचार व्यय में गिना जाता है
- आचार संहिता: SEC द्वारा निर्धारित
क्षेत्र पंचायत (Kshetra Panchayat)
- ब्लॉक स्तर पर
- सदस्य: सभी ग्राम प्रधान + प्रति 2,000 जनसंख्या पर 1 निर्वाचित सदस्य + MLAs/MLCs
- मुख्य कार्यकारी अधिकारी: खंड विकास अधिकारी (BDO)
- मुखिया: प्रमुख (Pramukh) — अप्रत्यक्ष चुनाव
- उप-प्रमुख का पद 2007 संशोधन से समाप्त
ज़िला पंचायत (Zila Panchayat)
- जिला स्तर पर
- सदस्य: सभी क्षेत्र पंचायतों के प्रमुख + प्रति 50,000 जनसंख्या पर 1 निर्वाचित सदस्य + MLAs/MPs/MLCs
- मुखिया: अध्यक्ष (Adhyaksha) — अप्रत्यक्ष चुनाव
- उपाध्यक्ष का पद 2007 संशोधन से समाप्त
- लागू अधिनियम: UP क्षेत्र पंचायत तथा ज़िला पंचायत अधिनियम, 1961
⚠️ 2007 संशोधन का सारांश: UP Act No. 44 of 2007 ने UP के सभी तीन पंचायत स्तरों पर "उप" पदों को एक साथ समाप्त किया — ग्राम स्तर पर उप-प्रधान, ब्लॉक स्तर पर उप-प्रमुख (Senior/Junior दोनों), और ज़िला स्तर पर उपाध्यक्ष।
केंद्रीय योजनाएँ
- मनरेगा / VB–G RAM G — रोज़गार गारंटी
- PMAY-G — प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)
- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)
- जल जीवन मिशन (हर घर जल)
- मध्याह्न भोजन योजना
- NRLM (दीनदयाल अंत्योदय)
राज्य विशेष पहल
- RGPSA (राजीव गांधी पंचायत सशक्तीकरण अभियान) — 75% केंद्र + 25% राज्य
- मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल योजना
- पंचायत भवन निर्माण कार्यक्रम
- Family ID से लिंकिंग (familyid.up.gov.in)
- BRGF (पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि) — 35 ज़िलों में
डिजिटल पहल (UP)
- e-Panchayat पोर्टल
- PlanPlus सॉफ्टवेयर
- ActionSoft से प्रगति निगरानी
- Panchayat Sahayak (हर ग्राम पंचायत में)
- ग्राम पंचायत अधिकारियों का न्यूनतम वेतन — सबसे बड़ी समस्या: ग्राम पंचायत अधिकारी (VPO), पंचायत सचिव और पंचायत सहायक जैसे पदों पर अत्यधिक कार्यभार होता है। एक-एक अधिकारी को कई ग्राम पंचायतों का प्रभार, लंबे क्षेत्र में भागदौड़, दैनिक फील्ड विज़िट, और दर्जनों योजनाओं का क्रियान्वयन करना पड़ता है। ऐसे में:
- पंचायत सचिव — कम ग्रेड पे के कारण वेतन उनकी ज़िम्मेदारियों और कार्यभार के अनुपात में बहुत कम है
- पंचायत सहायक — मात्र ₹6,000/माह का अल्प मानदेय (यह "सैलरी" नहीं, कॉन्ट्रैक्चुअल मानदेय है)
- भारी आकार — 58,000 ग्राम पंचायतें, प्रबंधन जटिल
- वित्त की कमी — अधिकांश पंचायतें केंद्रीय अनुदान पर निर्भर
- "प्रधान पति" प्रथा — महिला प्रधानों के पतियों का वास्तविक नियंत्रण
- MLA/MP का हस्तक्षेप — लाभार्थी चयन व हैंडपंप आवंटन में
- BDO की अत्यधिक शक्ति — निर्वाचित प्रतिनिधियों पर भारी पड़ना
- साक्षरता सीमित — ग्रामीण मतदाताओं में जागरूकता कम
- सामाजिक असमानता — जातिगत दबदबा
- ऑडिट में कमज़ोरी — सोशल ऑडिट अनियमित
- निर्वाचित प्रतिनिधियों का मानदेय अपर्याप्त — प्रधान के लिए ₹5,000/माह काफ़ी कम
- पंचायत भवन/सुविधाओं का अभाव — कई गांवों में बुनियादी ढाँचे की कमी
RTI के तहत
- UP पंचायत राज अधिनियम, 1947 में सूचना का अधिकार (RTI) प्रावधान
- SPIO (State Public Information Officer): पंचायत सचिव
- SAPIO: उप-जिला स्तर पर
- आवेदन: हिंदी या अंग्रेज़ी में; अक्षम होने पर SPIO सहायता देंगे
- शुल्क: UP Suchna Ka Adhikar (Fees aur Laagat Viniyam) Rules, 2006 के अनुसार
ग्राम सभा में भागीदारी
- हर नागरिक (18+) स्वतः सदस्य
- प्रश्न पूछने, प्रस्ताव लाने का अधिकार
- 2/3 बहुमत से प्रधान को हटाने की शक्ति (धारा 14)
- बजट पर आपत्ति उठाने का अधिकार
सोशल ऑडिट
- विशेष ग्राम सभा बैठक में भाग लेने का अधिकार
- मनरेगा कार्यों के रिकॉर्ड देखने का अधिकार
- भ्रष्टाचार/अनियमितता की रिपोर्ट
प्रश्न 1: UP में ग्राम प्रधान की सैलरी कितनी है?
₹5,000/माह मानदेय (दिसंबर 2021 से, पहले ₹3,500 था)।
प्रश्न 2: प्रधान बनने के लिए न्यूनतम आयु क्या है?
21 वर्ष।
प्रश्न 3: UP में पंचायत चुनाव कब होंगे?
अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच प्रस्तावित।
प्रश्न 4: क्या UP में उप-प्रधान का पद होता है?
नहीं। 20 अगस्त 2007 से प्रभावी UP Act No. 44 of 2007 के द्वारा उप-प्रधान, उप-प्रमुख और उपाध्यक्ष — सभी "उप" पद समाप्त कर दिए गए हैं। अब UP की ग्राम पंचायत में केवल प्रधान का पद है।
प्रश्न 5: क्या प्रधान को हटाया जा सकता है?
हाँ, ग्राम सभा 2/3 बहुमत से अविश्वास प्रस्ताव पारित कर सकती है (धारा 14)।
प्रश्न 6: प्रधान का पद रिक्त होने पर क्या होता है?
धारा 12-J के तहत निर्धारित प्राधिकारी (DM/SDM) ग्राम पंचायत के किसी सदस्य को अस्थायी रूप से प्रधान के दायित्व सौंपते हैं, जब तक नियमित प्रधान न आए।
प्रश्न 7: ग्राम सभा की बैठक में कौन शामिल हो सकता है?
18+ वर्ष के पंजीकृत मतदाता (मतदाता सूची में नाम दर्ज)।
प्रश्न 8: क्या एक व्यक्ति कई पंचायतों में चुना जा सकता है?
नहीं, अगर एक साथ दो स्तरों पर चुना जाए तो 60 दिन में एक को छोड़ना पड़ेगा।
प्रश्न 9: UP में ज़िला पंचायत अध्यक्ष का क्या दर्जा है?
राज्य मंत्री के समकक्ष, ₹15,500/माह मानदेय + सरकारी वाहन/स्टाफ़।
प्रश्न 10: ग्राम पंचायत में कितनी समितियाँ होती हैं?
6 समितियाँ — निर्माण, जल प्रबंधन, नियोजन व विकास, स्वास्थ्य व कल्याण, प्रशासनिक, शिक्षा।
प्रश्न 11: क्या महिला/SC/ST को हर समिति में प्रतिनिधित्व मिलता है?
हाँ, हर समिति में कम से कम एक महिला, एक SC/ST और एक OBC सदस्य अनिवार्य।
प्रश्न 12: UP में ग्राम पंचायत का कार्यकाल कितना होता है?
5 वर्ष।
प्रश्न 13: ग्राम सभा की कितनी बैठकें होती हैं?
UP में दो अनिवार्य — 26 जनवरी (खरीफ) और 15 अगस्त के आसपास (रबी)।
प्रश्न 14: कोरम कितना चाहिए?
UP में कुल सदस्यों का न्यूनतम 1/5 (20%)। केंद्रीय मॉडल में 10%।
प्रश्न 15: प्रधान के चुनाव में कितना खर्च कर सकते हैं?
UP 2026 चुनाव में अधिकतम ₹1,25,000 की व्यय सीमा।
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