🐄 अस्थाई गौआश्रय स्थल

UP निराश्रित गोवंश योजना — 6,433 केंद्र, 9.89 लाख गोवंश, सहभागिता योजना
UP Panchayat — Complete Guide

📖 संक्षिप्त परिचय: अस्थाई गौआश्रय स्थल उत्तर प्रदेश सरकार की निराश्रित/छुट्टा गोवंश के संरक्षण हेतु चलाई जा रही एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका उद्देश्य आवारा पशुओं से किसानों की फ़सलों को बचाना और गोवंश को सम्मानजनक आश्रय देना है। ये केंद्र मुख्यतः ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित होते हैं और ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) के निगरानी में रहते हैं।

📋 विषय सूची / Table of Contents
📘 1. पृष्ठभूमि — योजना क्यों शुरू हुई?▼

ज़रूरत के कारण

  • छुट्टा गोवंश की बढ़ती समस्या — दूध न देने वाले, बूढ़े या अनुत्पादक पशुओं का किसानों द्वारा त्याग
  • फ़सलों को भारी नुक़सान — आवारा पशु खड़ी फ़सल चरकर बर्बाद करते हैं
  • सड़क दुर्घटनाएँ — राजमार्गों पर पशुओं की वजह से
  • पशु-क्रूरता रोकथाम — भूख, बीमारी, वाहन दुर्घटनाओं से बचाव
  • गौ-सेवा का सांस्कृतिक महत्व — भारतीय परंपरा में गाय का विशेष स्थान

योजना का प्रारंभ

  • जनवरी 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू
  • सभी ग्राम पंचायतों में कम से कम एक अस्थाई गौआश्रय स्थल स्थापित करने का निर्देश
  • पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग और पंचायती राज विभाग की संयुक्त ज़िम्मेदारी
  • गौ-सेवा आयोग द्वारा राज्य-स्तरीय समीक्षा
📊 2. UP में गौआश्रय स्थलों का वर्तमान ढाँचा (2025–26)▼

UP में चार प्रकार के गौआश्रय संचालित हैं:

क्रमप्रकारसंख्यासंरक्षित गोवंशस्तर
1अस्थाई गौआश्रय स्थल6,4339.89 लाखग्राम पंचायत
2वृहद गो संरक्षण केंद्र5181.58 लाखब्लॉक / 200–400 क्षमता
3कान्हा गो-आश्रय32377,925शहरी (नगर निगम)
4कांजी हाउस25313,576पारंपरिक, नगर निकाय
कुल7,52712.39 लाख+

📌 महत्वपूर्ण: अस्थाई गौआश्रय स्थल सबसे व्यापक रूप से फैली हुई योजना है — यह 6,433 स्थानों पर लगभग 10 लाख निराश्रित गोवंश को आश्रय दे रही है। यह कुल संरक्षित गोवंश का लगभग 80% है।

✨ 3. अस्थाई गौआश्रय स्थल — मूल विशेषताएँ▼

स्थापना

  • प्रत्येक ग्राम पंचायत में आवश्यकता के अनुसार एक या अधिक केंद्र
  • ग्राम पंचायत की शामलात/सार्वजनिक भूमि पर निर्माण
  • 2 लाख रुपये तक का प्रारंभिक निर्माण बजट (ग्राम निधि से)
  • टिन-सेट छत, बैरिकेडिंग, मिनी सबमर्सिबल पंप, बड़े हौद

न्यूनतम सुविधाएँ

  • पीने का पानी (हौद व्यवस्था)
  • छाया (टिन-शेड या पेड़)
  • हरा चारा और सूखा भूसा
  • चिकित्सा सहायता
  • केयरटेकर की नियुक्ति
🏛️ 4. प्रशासनिक ढाँचा▼
स्तरज़िम्मेदार
समग्र निगरानीज़िलाधिकारी (DM)
ज़िला स्तरमुख्य पशु चिकित्साधिकारी (CVO)
ब्लॉक स्तरखण्ड विकास अधिकारी (BDO)
ग्राम स्तरग्राम प्रधान + ग्राम पंचायत सचिव
पशु चिकित्सापशु चिकित्साधिकारी (Veterinary Officer)
केयरटेकरदैनिक देखरेख के लिए नियुक्त कर्मचारी
💰 5. बजट और वित्तीय प्रावधान (2025–26)▼

UP बजट 2025–26

  • ₹2,000 करोड़ — छुट्टा गोवंश के रखरखाव हेतु (मुख्य आवंटन)
  • ₹140 करोड़ — वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना
  • ₹123 करोड़ — पशु चिकित्सालय/पशु सेवा केंद्रों का सुदृढ़ीकरण

दैनिक भरण-पोषण दर (Per Cow Per Day)

अवधिदरयोजना
2019–2024₹30/दिनप्रारम्भिक दर
फ़रवरी 2025 से₹50/दिनबढ़ी हुई दर (मुख्यमंत्री सहभागिता योजना में)

फंडिंग के स्रोत

  1. राज्य बजट — मुख्य स्रोत
  2. वित्त आयोग अनुदान — 14वें/15वें FC के तहत
  3. ग्राम निधि — ग्राम पंचायत का अपना कोष
  4. मनरेगा — निर्माण कार्यों में लागत
  5. CSR फंड — निजी कंपनियों के सहयोग से (विशेषकर CCTV के लिए)
  6. जन सहभागिता — दान, गौ-दान, स्वयंसेवा
🤝 6. मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना▼

उद्देश्य

निराश्रित पशुओं को किसानों/पशुपालकों को सुपुर्द करना ताकि:

  • परिवार की आजीविका बढ़े
  • पशु को स्थायी आश्रय मिले
  • गौआश्रयों पर भार कम हो

प्रोत्साहन राशि

  • ₹900/माह प्रति गाय (₹30/दिन × 30 दिन) — पहले की दर
  • ₹1,500/माह प्रति गाय (₹50/दिन) — फरवरी 2025 के बाद
  • अब सीधे बैंक खाते में DBT से

प्रगति (2025–26)

  • 1.83 लाख गोवंश सुपुर्द किए गए
  • 1.14 लाख लाभार्थी परिवार
  • 22 नवंबर 2020 (गोपाष्टमी) को कुपोषित बच्चों वाले 11 परिवारों को पहली बार गाय सौंपी गई
📹 7. CCTV निगरानी▼
  • 74 जिलों में 5,446 गौआश्रय स्थलों पर 7,592 CCTV लगाए गए
  • CSR फंड का उपयोग
  • तकनीक-आधारित निगरानी से:
    • भ्रष्टाचार कम
    • चारे की उपलब्धता पर नज़र
    • पशुओं की सुरक्षा
    • बीमारी/मृत्यु की त्वरित सूचना
🌾 8. भूसा बैंक व आत्मनिर्भर गौशाला मॉडल▼

भूसा बैंक योजना

  • हर गौशाला में "भूसा बैंक" स्थापित करने का निर्देश
  • सालभर भूसा स्टॉक सुनिश्चित
  • किसानों से समन्वय कर फसल अवशेष खरीद
  • प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों से जुड़ाव

आत्मनिर्भर गौशाला मॉडल

  • 8 मंडलों में "आदर्श गौशाला" स्थापित करने की योजना (जुलाई 2025)
  • गोमूत्र, गोबर-खाद, पंचगव्य से आय
  • जैविक खाद उत्पादन
  • दुग्ध उत्पादन
🏷️ 9. ईयर-टैगिंग व्यवस्था▼
  • पालतू, संरक्षित और छुट्टा गोवंश की ईयर-टैगिंग
  • पहचान और रिकॉर्ड के लिए
  • डुप्लिकेट सहायता रोकने के लिए
📝 10. गोवंश को गौआश्रय लाने की प्रक्रिया▼
  1. गांव में छुट्टा गोवंश की पहचान
  2. ग्राम पंचायत/ग्रामीणों की सूचना
  3. पशु चिकित्सक द्वारा स्वास्थ्य जांच
  4. टैगिंग
  5. गौआश्रय में पंजीकरण
  6. मालिक का पता लगाना (यदि संभव हो)
⏰ 11. दैनिक संचालन व निगरानी▼

दैनिक संचालन

  • सुबह-शाम चारा व पानी
  • साइलेज (हरे चारे का संरक्षित रूप) की उपलब्धता
  • टीकाकरण कैलेंडर का पालन
  • बीमार पशुओं का अलग आइसोलेशन
  • दूध देने वाली गायों का दोहन
  • मृत पशुओं के निस्तारण की उचित व्यवस्था

निगरानी व निरीक्षण

  • पशु चिकित्साधिकारी की नियमित विज़िट
  • BDO का साप्ताहिक/मासिक निरीक्षण
  • गौ-सेवा आयोग की समीक्षा
  • सोशल ऑडिट में रिकॉर्ड की जांच
💸 12. फंडिंग और बजट संबंधी समस्याएँ▼
  1. राशि का देर से ट्रांसफर — कई बार महीनों तक चारे के लिए पैसे नहीं आते
  2. ₹50/दिन भी अपर्याप्त — एक गाय को रोज़ चारा, पानी, दवा, देखरेख के लिए ₹80–100 ख़र्च आता है
  3. बढ़ती महंगाई — भूसे की क़ीमत दोगुनी हो चुकी, पर दर वही
  4. भुगतान में देरी — केयरटेकर व चारा सप्लायर को महीनों पैसे नहीं मिलते
🏗️ 13. बुनियादी ढाँचे की समस्याएँ▼
  1. अस्थाई निर्माण — टिन-शेड, कच्ची दीवारें बारिश/आँधी में टूट जाती हैं
  2. भूमि की कमी — ग्राम पंचायत की सार्वजनिक भूमि सीमित
  3. जल संकट — गर्मियों में हौद सूख जाते हैं
  4. बिजली की समस्या — सबमर्सिबल पंप चलाने में दिक्कत
  5. जल निकासी — गोबर-मूत्र के उचित निस्तारण की व्यवस्था नहीं
👷 14. मानव संसाधन की समस्याएँ▼
  1. केयरटेकर का अल्प मानदेय — ₹5,000–8,000/माह में दिनरात का काम
  2. प्रशिक्षित पशु-चिकित्सकों की कमी — एक VO के भरोसे कई गौआश्रय
  3. ग्राम पंचायत सचिव पर अतिरिक्त बोझ — पहले से ओवरलोडेड अधिकारी
  4. स्वयंसेवकों की कमी — स्थायी आधार पर कोई नहीं मिलते
📋 15. प्रशासनिक समस्याएँ▼
  1. विभागों के बीच समन्वय की कमी — पशुपालन बनाम पंचायती राज
  2. भ्रष्टाचार के आरोप — फर्ज़ी गोवंश दिखाकर धन का दुरुपयोग
  3. निरीक्षण में अनियमितता — कई गौआश्रयों का दौरा महीनों नहीं होता
  4. 100 से कम गोवंश वाले केंद्र बंद — लागत-दक्षता के नाम पर छोटे केंद्र बंद (अप्रैल 2026 में कौशांबी के सिराथू ब्लॉक में 5 केंद्र बंद)
  5. हैंडओवर में देरी — वृहद गो-संरक्षण केंद्र तैयार होने के बाद भी तकनीकी कारणों से हैंडओवर में महीनों लगते हैं
  6. पंचायत सचिव पर अव्यवहारिक अतिरिक्त बोझ — एक पंचायत सचिव पहले से ही कई ग्राम पंचायतों का प्रभार, दर्जनों योजनाओं का क्रियान्वयन, भुगतान, MIS अपडेट, ग्राम सभा बैठकें, सोशल ऑडिट, e-Gram Swaraj, GPDP, SBM, PMAY-G आदि का बोझ संभालता है। इसके ऊपर प्रतिदिन गौशाला पर पहुँचना और दैनिक लॉग बुक ऑनलाइन भरना पूरी तरह अव्यवहारिक है। नतीजा — या तो कार्य समय पर नहीं हो पाता, या काग़ज़ों पर खानापूर्ति होती है, या फिर सचिव का स्वास्थ्य/मनोबल प्रभावित होता है।
🐄 16. पशु-कल्याण से जुड़ी समस्याएँ▼
  1. ओवरक्राउडिंग — क्षमता से ज़्यादा पशु रखना
  2. चारे की कमी — विशेषकर गर्मियों में
  3. बीमारी का फैलाव — भीड़भाड़ से संक्रमण
  4. अकाल मृत्यु — पर्याप्त देखरेख न मिलने से
  5. साँडों की आक्रामकता — नर-मादा अलग नहीं किए जाते
  6. कोई प्रजनन नियंत्रण नहीं — संख्या बेक़ाबू
👥 17. सामाजिक-आर्थिक समस्याएँ▼
  1. ग्राम प्रधान पर दबाव — बिना पर्याप्त संसाधन दिए ज़िम्मेदारी
  2. किसान अब भी गाय छोड़ते हैं — मूल समस्या (अनुत्पादक पशुओं का त्याग) जारी
  3. सहभागिता योजना की स्वीकार्यता सीमित — ₹1,500/माह में एक गाय पालना लाभकारी नहीं
  4. कांजी हाउस की परंपरागत व्यवस्था कमज़ोर — नगर निकायों के हाथ से निकल रही
💡 18. नीतिगत सुधार — मौजूदा स्थिति की मूल समस्या▼

🎯 यह सेक्शन एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक सुधार-सुझाव को विस्तार से प्रस्तुत करता है, जो ज़मीनी अनुभव पर आधारित है।

मौजूदा स्थिति — समस्या का मूल

वर्तमान व्यवस्था में अस्थाई गौआश्रय स्थल के संचालन का प्रमुख भार ग्राम पंचायत सचिव पर डाल दिया गया है। सचिव से अपेक्षा की जाती है कि वह:

  • प्रतिदिन गौशाला पहुँचे
  • पशुओं की गिनती और हाज़िरी दर्ज करे
  • दैनिक लॉग बुक ऑनलाइन भरे (MIS/पोर्टल पर)
  • चारे-पानी की स्थिति रिपोर्ट करे
  • केयरटेकर का भुगतान सुनिश्चित करे
  • चारा सप्लायरों से समन्वय करे
  • निरीक्षण रिकॉर्ड रखे

यह क्यों अव्यवहारिक है?

एक पंचायत सचिव पर पहले से ही अत्यधिक कार्यभार है:

  1. एक सचिव = 3–5 ग्राम पंचायतों का प्रभार (UP में औसत)
  2. 50+ योजनाएँ/कार्यक्रम का क्रियान्वयन — मनरेगा (VB-G RAM G), PMAY-G, स्वच्छ भारत, जल जीवन मिशन, NRLM, वृद्धावस्था/विधवा/दिव्यांग पेंशन, आदि
  3. e-Gram Swaraj, PRIA Soft, AuditOnline, GPDP जैसे दर्जनों पोर्टल अपडेट करने होते हैं
  4. ग्राम सभा बैठकें, सोशल ऑडिट, लाभार्थी चयन
  5. वित्तीय लेखा — बिल-भुगतान, UC, जीएसटी रिटर्न
  6. जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन, प्रमाण पत्र जारी करना
  7. BDO और अन्य विभागों से समन्वय
  8. जाँच/निरीक्षण के समय उपस्थिति
  9. कम ग्रेड पे में इतनी ज़िम्मेदारियाँ — पहले से ही मनोबल कम

⚠️ ऐसे में हर दिन गौशाला जाकर लॉग बुक भरना — न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि सचिव को उसके मुख्य कार्यों से भटकाता है।

🎯 19. प्रस्तावित मॉडल — पशु चिकित्सक + ग्राम प्रधान▼

🎯 मुख्य प्रस्ताव: अस्थाई गौआश्रय स्थल का पूरा संचालन पशुपालन विभाग को सौंपा जाए, और इसका दैनिक प्रबंधन पशु चिकित्सक और ग्राम प्रधान के संयुक्त हस्ताक्षर से चले। पंचायत सचिव को इस पूरी व्यवस्था से बाहर रखा जाए।

प्रस्तावित भूमिकाएँ

पदभूमिका
पशुपालन विभागपूर्ण नियंत्रण, नीति निर्माण, बजट आवंटन, प्रशिक्षण, निगरानी
पशु चिकित्साधिकारी (Veterinary Officer)तकनीकी प्रमुख, स्वास्थ्य जांच, दवा, टीकाकरण, दैनिक लॉग बुक
ग्राम प्रधानसामाजिक जवाबदेही, स्थानीय निगरानी, सह-हस्ताक्षर
केयरटेकरदैनिक देखरेख, चारा-पानी
BDOसमग्र निगरानी, शिकायत निवारण
पंचायत सचिव❌ कोई भूमिका नहीं — अन्य पंचायत कार्यों पर ध्यान केंद्रित करे
✨ 20. इस मॉडल के प्रमुख लाभ▼

प्रशासनिक लाभ

  1. विशेषज्ञता का उपयोग — पशु चिकित्सक ही पशुओं का विशेषज्ञ है, वही जाने
  2. जवाबदेही स्पष्ट — एक ही विभाग (पशुपालन) को पूरी ज़िम्मेदारी
  3. दोहरा हस्ताक्षर = दोहरी निगरानी — पशु चिकित्सक (तकनीकी) + प्रधान (सामाजिक)
  4. पंचायत सचिव का बोझ कम — अन्य योजनाओं पर बेहतर काम
  5. भ्रष्टाचार में कमी — दो स्वतंत्र हस्ताक्षरकर्ता होने से गड़बड़ी कठिन
  6. विभागीय विवाद समाप्त — "पशुपालन बनाम पंचायती राज" का टकराव ख़त्म

तकनीकी लाभ

  1. पशुओं की बेहतर देखभाल — प्रशिक्षित पेशेवर की निरंतर निगरानी
  2. बीमारी की त्वरित पहचान — पशु चिकित्सक रोज़ आएगा
  3. सही डेटा — तकनीकी व्यक्ति द्वारा भरी गई लॉग बुक अधिक सटीक
  4. टीकाकरण/बधियाकरण समय पर

वित्तीय लाभ

  1. बजट सीधा पशुपालन विभाग को — बीच के स्तरों में देरी नहीं
  2. लागत-दक्षता — विशेषज्ञ के हाथ में संचालन
  3. भुगतान पारदर्शी — दो हस्ताक्षर से चेक-बैलेंस

सामाजिक लाभ

  1. प्रधान की सामुदायिक भूमिका — गांव की आवाज़ बना रहे
  2. ग्रामीणों की शिकायत का मंच — प्रधान से सीधे संवाद
  3. पंचायत की गरिमा — सचिव को अनावश्यक विवादों से बचाव
🏗️ 21. कार्यान्वयन का प्रस्तावित ढाँचा▼
राज्य स्तर: पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग (पूर्ण नियंत्रण) ↓ ज़िला स्तर: मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (CVO) ↓ ब्लॉक स्तर: उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ↓ गांव स्तर: पशु चिकित्साधिकारी (VO) + ग्राम प्रधान [संयुक्त हस्ताक्षर से संचालन] ↓ केयरटेकर (दैनिक देखरेख)
📅 23. हाल की महत्वपूर्ण घटनाएँ▼

अप्रैल 2026

  • कौशांबी के सिराथू ब्लॉक में 100 से कम गोवंश वाली 5 अस्थाई गौशालाएँ बंद
  • इनका 745 गोवंश अन्य बड़े केंद्रों में स्थानांतरित
  • "लागत-दक्षता" के नाम पर छोटे केंद्रों को बंद करने की नई नीति

फरवरी 2025

  • बजट 2025: ₹2,000 करोड़ का प्रावधान
  • भरण-पोषण भत्ता ₹30 से ₹50/दिन किया गया

जुलाई 2025

  • 8 मंडलों में आदर्श गौशाला स्थापित करने की घोषणा
  • आत्मनिर्भर गौशाला मॉडल

बस्ती ज़िला (अप्रैल 2026)

  • 6 ब्लॉकों में नए गो-आश्रय स्थल बनाने की घोषणा
  • 200–400 पशुओं की क्षमता वाले वृहद केंद्र
  • वर्तमान में 59 केंद्र संचालित; नए जुड़ने पर संख्या बढ़ेगी
🗺️ 24. तुलनात्मक दृष्टिकोण — अन्य राज्य▼

राजस्थान

  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय चारागाह विकास आधारित गौ माता आश्रय स्थल
  • 457 पंचायत समितियों में एक-एक ग्राम पंचायत का चयन
  • 1,377 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान (राज्य 90%, एजेंसी 10%)
  • 1,500 ग्राम पंचायतों में निर्माण (2022-24 में चरणबद्ध)
  • चारागाह विकास + गौ-आश्रय एकीकृत मॉडल

उत्तराखंड

  • Establishment of Cow Shelters योजना
  • अनुत्पादक, परित्यक्त पशुओं के लिए
  • राज्य सरकार द्वारा अनुदान

केंद्रीय स्तर

  • Animal Welfare Board of India (AWBI) — बचाए गए पशुओं के लिए
  • ₹80/दिन प्रति पशु (पहले ₹25 था) — अधिकतम 2 वर्ष
  • वार्षिक सीमा: ₹5 लाख प्रति गौशाला
🎯 25. अन्य सुझाव और सुधार की दिशाएँ▼

फंडिंग संबंधी

  1. दैनिक दर ₹80–100 तक बढ़ाई जाए (बढ़ती महंगाई के अनुसार)
  2. ससमय भुगतान सुनिश्चित हो — मासिक नियमित रिलीज़
  3. अलग "गौ-रक्षा निधि" बनाई जाए राज्य स्तर पर
  4. CSR फंड को गौआश्रयों के लिए अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए

बुनियादी ढाँचे के लिए

  1. पक्का निर्माण — अस्थाई टिन-शेड की जगह स्थायी ढाँचे
  2. जल पुनर्भरण संरचनाएँ — तालाब, चेक डैम पास में
  3. बायोगैस प्लांट — गोबर से बिजली व ईंधन
  4. कम्पोस्ट/वर्मी-कम्पोस्ट यूनिट — जैविक खाद से आय

मानव संसाधन

  1. केयरटेकर का मानदेय ₹15,000+ किया जाए
  2. पशु-मित्र योजना — गांव के युवाओं को प्रशिक्षण
  3. पशु-चिकित्सकों की भर्ती बढ़ाई जाए
  4. महिला स्वयं-सहायता समूहों को जोड़ा जाए (NRLM के तहत)

तकनीकी सुधार

  1. हर केंद्र पर CCTV + डिजिटल रजिस्टर
  2. जियो-टैगिंग हर गौआश्रय की
  3. मोबाइल ऐप — रियल-टाइम निगरानी
  4. प्रत्येक पशु का ईयर-टैग + QR कोड
  5. AI-आधारित स्वास्थ्य निगरानी

नीतिगत सुधार

  1. पशु-त्याग पर क़ानूनी दंड — किसानों द्वारा पशु छोड़ने पर कार्रवाई
  2. अनिवार्य गौ-बीमा — हर पशुपालक के लिए
  3. प्रजनन नियंत्रण — नसबंदी/बधियाकरण अभियान
  4. कृषि-पशुपालन एकीकृत मॉडल — ज़ीरो-बजट नैचुरल फार्मिंग से जोड़ना
  5. सहभागिता योजना की राशि बढ़ाकर ₹3,000/माह की जाए

सामाजिक जागरूकता

  1. स्कूल पाठ्यक्रम में गौ-सेवा व पशुपालन जोड़ा जाए
  2. पंचायत स्तर पर "गौ-रक्षा समिति" गठित हो
  3. गौ-सेवकों को सार्वजनिक सम्मान मिले
  4. धार्मिक/सामाजिक संस्थाओं का सहयोग
📊 26. महत्वपूर्ण तथ्य — एक नज़र में▼
  • कुल गौआश्रय स्थल (UP): 7,527
  • अस्थाई गौआश्रय स्थल: 6,433 (85%)
  • संरक्षित गोवंश: 12.39 लाख+
  • अस्थाई गौआश्रयों में गोवंश: 9.89 लाख (80%)
  • UP बजट 2025–26: ₹2,000 करोड़
  • दैनिक भरण-पोषण दर: ₹50/पशु/दिन (फरवरी 2025 से)
  • सहभागिता योजना लाभार्थी: 1.14 लाख परिवार
  • सहभागिता योजना गोवंश: 1.83 लाख
  • CCTV स्थापित: 5,446 स्थलों पर 7,592 कैमरे (74 जिलों में)
  • योजना शुरू: जनवरी 2019
  • नोडल विभाग: पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग + पंचायती राज विभाग
  • राज्य-स्तरीय निगरानी: UP गौ-सेवा आयोग
❓ 28. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)▼

प्रश्न 1: अस्थाई गौआश्रय स्थल कौन चलाता है?

वर्तमान में: ग्राम प्रधान + पंचायत सचिव, BDO की निगरानी में, पशुपालन विभाग का तकनीकी सहयोग।
प्रस्तावित सुधार (देखें सेक्शन 18-22): संचालन पूरी तरह पशुपालन विभाग के नियंत्रण में हो, दैनिक प्रबंधन पशु चिकित्सक + ग्राम प्रधान के संयुक्त हस्ताक्षर से हो; पंचायत सचिव को इस व्यवस्था से बाहर रखा जाए।

प्रश्न 2: एक पशु के लिए सरकार कितना पैसा देती है?

₹50/दिन (फरवरी 2025 से) यानी ₹1,500/माह प्रति पशु।

प्रश्न 3: क्या किसान छुट्टा गाय को गौआश्रय में सौंप सकता है?

हाँ, कोई भी किसान छुट्टा पशु ग्राम पंचायत को सूचित कर गौआश्रय में भेज सकता है।

प्रश्न 4: क्या कोई किसान गौआश्रय से गाय ले सकता है?

हाँ, मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत ₹1,500/माह पाकर गाय गोद ले सकता है।

प्रश्न 5: गौआश्रय की शिकायत कहाँ करें?

ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO), मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (CVO), या UP गौ-सेवा आयोग (लखनऊ) में।

प्रश्न 6: CCTV कहाँ से देख सकते हैं?

ज़िलाधिकारी कार्यालय या पशुपालन विभाग के कंट्रोल रूम से निगरानी होती है।

प्रश्न 7: क्या गौआश्रय में पशु-बीमा होता है?

सीमित रूप से; सभी पशुओं का नियमित बीमा नहीं होता — यह एक प्रमुख समस्या है।

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