- 1. परिचय एवं कानूनी आधार
- 2. ग्राम सभा (धारा 3–4)
- 3. ग्राम पंचायत की स्थापना (धारा 11–12)
- 4. प्रधान व सदस्य
- 5. कार्यकाल, योग्यता, अयोग्यता
- 6. बैठकें, कोरम, कार्यवाही
- 7. कार्य एवं कर्तव्य (धारा 15)
- 8. करारोपण एवं ग्राम निधि
- 9. अविश्वास प्रस्ताव, निलंबन
- 10. लेखा परीक्षा एवं नियंत्रण
- 11. आरक्षण (SC/ST/OBC/महिला)
अधिनियम का नाम: उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 (United Provinces Panchayat Raj Act, 1947)
पारित: 7 दिसंबर 1947 · प्रभावी: भारत का पहला पंचायत राज अधिनियम
उद्देश्य:
- ग्रामीण स्वशासन (Rural Self-Government) की स्थापना
- ग्राम स्तर पर लोकतांत्रिक निकाय की व्यवस्था
- विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन
- ग्रामीण विवादों का स्थानीय स्तर पर निपटारा (न्याय पंचायत व्यवस्था — UP में वर्तमान में समाप्त)
प्रमुख संशोधन
- 73वाँ संविधान संशोधन 1992: त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था अनिवार्य — ग्राम, क्षेत्र, जिला
- UP Panchayat Raj (Amendment) Act 1994: 73वें संशोधन के अनुरूप बदलाव
- 2007, 2015, 2019, 2020: आरक्षण, चुनाव, अविश्वास प्रस्ताव में संशोधन
📌 यह अधिनियम केवल उत्तर प्रदेश में लागू है। हर राज्य का अपना अलग पंचायत राज अधिनियम है। संवैधानिक रूप से 11वीं अनुसूची के 29 विषय ग्राम पंचायत को सौंपे गए हैं।
ग्राम सभा क्या है?
ग्राम सभा = किसी गाँव के सभी वयस्क निवासियों (जिनका नाम मतदाता सूची में दर्ज है) से मिलकर बना शक्तिशाली निकाय।
- सदस्य: गाँव का प्रत्येक 18 वर्ष या अधिक का व्यक्ति जो मतदाता सूची में है
- अध्यक्ष: ग्राम प्रधान
- सचिव (Convenor): ग्राम पंचायत सचिव
बैठकें (धारा 3-A)
- न्यूनतम 2 बैठकें प्रति वर्ष अनिवार्य
- आम-तौर पर: जून और दिसंबर (खरीफ एवं रबी के पहले)
- अतिरिक्त विशेष बैठक प्रधान या 1/5 सदस्यों की माँग पर
- कोरम: कुल मतदाताओं का 1/5 या 50 व्यक्ति (जो भी कम हो); महिलाओं के लिए कुल महिलाओं का 1/3 भी अनिवार्य
ग्राम सभा की शक्तियाँ एवं कार्य
- ग्राम पंचायत के वार्षिक बजट एवं योजनाओं का अनुमोदन
- MGNREGA, PMAY, SBM आदि योजनाओं के लाभार्थी चयन
- ग्राम पंचायत के कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit)
- विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करना
- ग्राम पंचायत द्वारा की गई गतिविधियों की समीक्षा
- वार्षिक लेखे एवं लेखा परीक्षा रिपोर्ट पर चर्चा
💡 ग्राम सभा सर्वोपरि है — यह ग्राम पंचायत से ऊपर है। ग्राम पंचायत ग्राम सभा के प्रति जवाबदेह होती है।
राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा किसी गाँव या गाँवों के समूह के लिए एक ग्राम पंचायत का गठन करती है।
न्यूनतम जनसंख्या मानदंड
| जनसंख्या | वार्ड संख्या (सदस्य) |
|---|---|
| 1,000 तक | 9 |
| 1,001 से 2,000 | 11 |
| 2,001 से 3,000 | 13 |
| 3,001 और अधिक | 15 |
⚖️ उपरोक्त के अलावा: 1 प्रधान + सभी वार्ड सदस्य = ग्राम पंचायत
वार्ड विभाजन
- प्रत्येक वार्ड से 1 सदस्य चुना जाता है
- वार्डों का विभाजन जिलाधिकारी (DM) करते हैं
- जनसंख्या के आधार पर लगभग बराबर वार्ड
मुख्यालय
ग्राम पंचायत का एक निश्चित मुख्यालय (पंचायत भवन / ग्राम सचिवालय) होता है जहाँ बैठकें और कामकाज होता है।
ग्राम प्रधान (Pradhan)
- चुनाव: ग्राम सभा के सभी मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव
- पदनाम: अध्यक्ष — ग्राम पंचायत का प्रमुख
- मानदेय (UP): राज्य सरकार द्वारा निर्धारित (वर्तमान में ₹5,000/माह)
- अनुपस्थिति: प्रधान की अनुपस्थिति में बैठक की अध्यक्षता सदस्यों द्वारा चुना गया कार्यवाहक सदस्य करता है
📌 नोट: पहले के कानून में उप-प्रधान का पद था, परंतु उत्तर प्रदेश में यह पद समाप्त कर दिया गया है। वर्तमान में केवल प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य होते हैं।
सदस्य (Ward Members)
- प्रत्येक वार्ड से प्रत्यक्ष चुनाव
- ग्राम पंचायत की बैठकों में मतदान का अधिकार
- प्रधान की अनुपस्थिति में बैठक संचालन हेतु सदस्यों से चुनाव
- बैठक भत्ता: राज्य सरकार द्वारा निर्धारित (UP में प्रति बैठक ₹100–200)
सचिव / ग्राम पंचायत अधिकारी (Secretary)
- UP सरकार का नियुक्त कर्मचारी — पंचायतीराज विभाग
- रिकॉर्ड रखना, बैठकों की कार्यवाही, भुगतान, रिपोर्टिंग
- चुनाव का सदस्य नहीं — प्रशासनिक अधिकारी है
- एक सचिव कई ग्राम पंचायतों के लिए (UP में सामान्यत: 2–4 GP प्रति सचिव)
💡 पंचायत सहायक / DEO: eGramSwaraj पोर्टल entry, योजना डेटा entry के लिए अलग संविदा कर्मचारी। UP में प्रधान/सचिव द्वारा रखा जाता है (मानदेय ₹6,000/माह — UP सरकार द्वारा निर्धारित)।
कार्यकाल (धारा 12-B)
- 5 वर्ष — प्रधान एवं सदस्य दोनों के लिए
- कार्यकाल पहली बैठक की तिथि से शुरू
- मध्यावधि चुनाव अगर पद रिक्त हो (कार्यकाल के 6 माह से अधिक शेष होने पर)
योग्यता (Qualification) — UP
- आयु: न्यूनतम 21 वर्ष
- मतदाता: उस ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में नाम दर्ज
- भारत का नागरिक
- स्वच्छ घर में कार्यात्मक शौचालय — UP में 2015 संशोधन से अनिवार्य
अयोग्यताएँ (Disqualifications) — UP
- दिवालिया घोषित व्यक्ति
- पागल / अस्वस्थ मन का घोषित व्यक्ति
- केंद्र / राज्य सरकार या किसी स्थानीय निकाय में सेवारत व्यक्ति
- आपराधिक अपराध (नैतिक पतन / बलात्कार / भ्रष्टाचार) में दोषसिद्ध — 2 वर्ष या अधिक की सजा
- ग्राम पंचायत के साथ ठेका या लाभ के पद पर व्यक्ति
- ग्राम पंचायत से 3 माह से अधिक राशि बकाया
- पूर्व में अविश्वास प्रस्ताव से हटाया गया हो — 6 वर्ष तक अयोग्य
- कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार / चुनावी कदाचार में दोषसिद्ध
💡 नोट: शिक्षा की न्यूनतम योग्यता (कक्षा 8 / कक्षा 5) का प्रावधान हरियाणा आदि कुछ राज्यों में लागू है, परंतु उत्तर प्रदेश में शिक्षा-योग्यता अनिवार्य नहीं है। इसी प्रकार, "2 से अधिक संतान" वाली अयोग्यता भी UP में लागू नहीं है।
ग्राम पंचायत की बैठकें
- न्यूनतम 12 बैठकें प्रति वर्ष (प्रत्येक माह 1)
- बैठक की सूचना 3 दिन पहले सभी सदस्यों को
- स्थान: ग्राम पंचायत भवन / सार्वजनिक स्थान
- समय: प्रधान तय करते हैं
कोरम (Quorum)
कुल सदस्यों का 1/3 (minimum 3) — कोरम के बिना बैठक अवैध।
कार्यवाही
- प्रधान की अध्यक्षता; अनुपस्थिति में सदस्यों द्वारा चुना गया कार्यवाहक सदस्य (UP में उप-प्रधान पद समाप्त)
- सचिव मिनट्स (Proceedings) लिखता है
- निर्णय बहुमत से; बराबर पड़ने पर अध्यक्ष का निर्णायक वोट
- Proceedings Register में हस्ताक्षर आवश्यक
ग्राम सभा की बैठकें
- न्यूनतम 2 बैठकें/वर्ष (जून, दिसंबर)
- कोरम: 1/5 मतदाता या 50 (जो कम) + 1/3 महिलाएँ
- यदि कोरम न हो: बैठक स्थगित, 15 दिन बाद पुन: आहूत (कोरम की अनिवार्यता नहीं)
ग्राम पंचायत को धारा 15 के तहत विस्तृत कार्य-कर्तव्य सौंपे गए हैं। 73वें संविधान संशोधन के बाद 11वीं अनुसूची के 29 विषय भी जोड़े गए।
अनिवार्य कार्य (Obligatory)
- स्वच्छता एवं सफाई (Sanitation)
- पेयजल की व्यवस्था
- गाँव की गलियाँ, नालियाँ, जल निकासी
- सार्वजनिक स्थल, पार्क, कब्रिस्तान / श्मशान
- स्ट्रीट लाइट
- जन्म-मृत्यु पंजीकरण सहायक भूमिका
- प्राथमिक शिक्षा का प्रोत्साहन
- लाइब्रेरी, खेल-कूद, पुस्तकालय
- कृषि विकास, पशुपालन सहायता
- हाट-बाज़ार, मेले
वैकल्पिक कार्य (Discretionary)
- ग्रामीण विद्युतीकरण
- गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम
- महिला एवं बाल विकास
- सामाजिक वानिकी
11वीं अनुसूची के 29 विषय (Schedule-XI)
कृषि, भूमि सुधार, लघु सिंचाई, पशुपालन, मत्स्य पालन, सामाजिक वानिकी, लघु वन-उत्पाद, लघु उद्योग, खादी-ग्रामोद्योग, ग्रामीण आवास, पेयजल, ईंधन एवं चारा, सड़क-पुल, विद्युत वितरण, गैर-पारंपरिक ऊर्जा, गरीबी उन्मूलन, प्राथमिक शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, पुस्तकालय, सांस्कृतिक गतिविधियाँ, हाट-बाज़ार, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, महिला-बाल विकास, समाज कल्याण, SC/ST कल्याण, PDS, सामुदायिक संपत्ति।
ग्राम पंचायत द्वारा लगाए जा सकने वाले कर (धारा 37)
- गृह कर (House Tax) — भवनों पर
- जल कर — पंचायत द्वारा आपूर्ति पर
- प्रकाश कर — स्ट्रीट लाइट पर
- स्वच्छता कर — सफाई सेवा पर
- पशु कर — मवेशी बाज़ार, मेला आदि
- व्यवसाय / व्यापार कर
- वाहन कर — पशु-वाहन, ठेले आदि पर
- मेला / बाज़ार शुल्क, लाइसेंस शुल्क
📌 नया कर लगाने या दर बदलने के लिए ग्राम सभा का अनुमोदन + राज्य सरकार की मंजूरी अनिवार्य।
ग्राम निधि (Gram Nidhi / GP Fund — धारा 38)
ग्राम पंचायत की सभी आय एक कोष में जमा होती है जिसे ग्राम निधि कहते हैं:
- पंचायत द्वारा लगाए कर / शुल्क / दंड
- राज्य सरकार से अनुदान
- केंद्र सरकार से अनुदान (Finance Commission)
- अन्य आय — दान, ब्याज, पंचायत संपत्ति से किराया
मुख्य निधि स्रोत
| स्रोत | विवरण |
|---|---|
| 15वाँ वित्त आयोग | Tied (25% SBM/जल) + Untied (75%) — केंद्र से अनुदान |
| 14वाँ वित्त आयोग | पूर्ववर्ती अनुदान (लगभग समाप्त) |
| राज्य वित्त आयोग (SFC) | UP सरकार से अनुदान |
| MGNREGA | मजदूरी भुगतान केंद्र द्वारा, सामग्री 60:40 अनुपात |
| Own Source Revenue | पंचायत के अपने कर/शुल्क |
बजट
- वार्षिक बजट तैयार करना अनिवार्य — फरवरी माह में
- ग्राम सभा से अनुमोदन + राज्य सरकार को प्रस्तुत
- GPDP (Gram Panchayat Development Plan) के साथ integration
अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion — धारा 14)
- प्रधान के विरुद्ध लाया जा सकता है
- कार्यकाल के 2 वर्ष बाद ही संभव (UP में 2020 संशोधन से)
- कुल सदस्यों के 1/2 से अधिक का लिखित प्रस्ताव
- जिलाधिकारी (DM) को प्रस्तुत
- 30 दिन के भीतर विशेष बैठक
- 2/3 बहुमत से पारित होने पर पद रिक्त
- असफल प्रस्ताव के बाद 2 वर्ष तक फिर से प्रस्ताव नहीं
त्यागपत्र (Resignation)
- प्रधान: जिलाधिकारी (DM) को लिखित त्यागपत्र
- सदस्य: प्रधान को (प्रधान की अनुपलब्धता में DM को)
- स्वीकृति के बाद पद रिक्त; त्यागपत्र से 15 दिन के भीतर DM निर्णय
निलंबन (Suspension)
राज्य सरकार / जिलाधिकारी प्रधान या सदस्य को निम्नलिखित पर निलंबित कर सकता है:
- वित्तीय अनियमितता / भ्रष्टाचार
- पद का दुरुपयोग
- गंभीर कदाचार
- आपराधिक मामला दर्ज होना
⚠️ निलंबन के बाद जाँच होती है। दोष सिद्ध होने पर पद से हटाना (Removal) + आगे चुनाव लड़ने पर रोक।
लेखा परीक्षा (Audit — धारा 36)
- वार्षिक लेखा परीक्षा अनिवार्य — हर वित्तीय वर्ष के बाद
- Auditor: राज्य सरकार द्वारा नियुक्त — सामान्यत: Local Fund Audit विभाग
- CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की भूमिका भी — 73वें संशोधन से
Social Audit (सामाजिक अंकेक्षण)
- ग्राम सभा द्वारा किया जाता है
- MGNREGA, PMAY, SBM जैसी योजनाओं की पारदर्शिता
- Muster Roll, भुगतान, लाभार्थी सूची की सार्वजनिक समीक्षा
नियंत्रण (Government Control)
- जिलाधिकारी (DM) — नियंत्रण अधिकारी
- मुख्य विकास अधिकारी (CDO)
- जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO)
- खण्ड विकास अधिकारी (BDO / ADO)
निरीक्षण
- BDO / ADO / DPRO द्वारा नियमित निरीक्षण
- अनियमितता पाए जाने पर रिपोर्ट जिलाधिकारी को
- प्रधान / सचिव से स्पष्टीकरण
73वें संशोधन के अनुसार
- SC/ST: जनसंख्या के अनुपात में वार्ड एवं प्रधान पद में आरक्षण
- OBC: राज्य सरकार द्वारा निर्धारित (UP में 27% तक)
- महिला: न्यूनतम 1/3 (33%) — UP में 50% (2015 से)
UP में आरक्षण rotation
हर नए चुनाव में वार्ड और पंचायत स्तर पर आरक्षण की श्रेणी rotate होती है, ताकि सभी वर्गों को अवसर मिले।
आरक्षण का निर्धारण
- राज्य सरकार द्वारा जनगणना आंकड़ों के आधार पर
- जिलाधिकारी अधिसूचना द्वारा घोषित करते हैं
- चुनाव से पहले अंतिम सूची प्रकाशित
📌 द्विसंतान नीति: जिनके 2 से अधिक जीवित बच्चे हैं और वे 1995 के बाद जन्मे हैं — कुछ राज्यों में अयोग्य माने जाते हैं (UP में वर्तमान में लागू नहीं)।
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